1990 के दशक में आतंकवाद प्रभावित रही चिनाब घाटी में एक बार फिर दहशतगर्दों की मौजूदगी बढ़ रही है। बीते दो साल में इस क्षेत्र में न सिर्फ आतंकी हमले बढ़े हैं, बल्कि आतंकियों की मौजूदगी भी दर्ज हुई है। पहलगाम आतंकी हमले से पहले ही भद्रवाह, डोडा और किश्तवाड़ के जंगलों में पांच से छह आतंकियों के सक्रिय होने की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को मिली है। ग्रामीणों की ओर से लगातार संदिग्धों को देखा जाना इसे और पुष्ट करता है। इसके बाद इलाके की न सिर्फ ड्रोन से निगरानी की जा रही है, बल्कि सेना के साथ-साथ ग्राम सुरक्षा गार्ड (वीडीजी) भी मुस्तैद हो गए हैं।